हे राम!
मंदिर वही बनायेंगे पर कागज नाही देखायेंगे ,
राशन पानी मँगोंगे तो हम टिड्डी कि बिर्याणी खिलायेंगे,
जॉब कि बात करते तो हम अँप्लिकेशन बॅन कारवायेंगे,
परत्रकारिता मागोंगे तो हम राफेल राफेल उडयेंगे
भूक प्यास शिक्षा कि बात करोगे तो हम चीन चीन चिल्लायेंगे!
मंदिर वही बनायेंगे पर कागज नाही देखायेंगे ,
क्या हालत कर रखी है अपनी सरंजामी कि, हम तो शवो को भी जिंदा जलाएंगे
आप राम राम चिल्लाओगे वो कारसेवक लायेंगे,
आप समानता मँगोंगे वो जाती व्यवस्था दिखायेंगे,
आप हॉस्पिटल मँगोंगे तो वो मजहब बीच में लायेंगे!
बहोत नसलो से तुम्हारा कटता अय है इस बार लम्बा काटेगा,
भारत का बच्चा बच्चा जय जय श्री राम बोलेगा!
ये सवाल न सोचने वाला शायद कुंभकरण हि बनेगा,
अंदर से कमजोर रेह के केसे वो रामराज्य बनायेगा,
हमारी छोडो कबीर तो मानो, रावण तो नजदिक मन में है उसको तो पहले जलालो!
संत कबीर लिखते है :
राम नाम तिहुं लोक मे सकल रहा भरपूर
जो जाने तिही निकट है, अनजाने तिही दूर।
(The name of Ram is all-pervasive in the three worlds
One who knows is near but the ignorant are very far from this truth)
Written by Anonymous. Pasted as received
Comments
Post a Comment